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Hymn No. 2162 | Date: 14-Feb-2001
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जिंदगी गुजर जाये बंदगी करते हुये तेरी, रहे कोई भी काम करुं तेरा ईनाम समझके।
जिंदगी गुजर जाये बंदगी करते हुये तेरी, रहे कोई भी काम करुं तेरा ईनाम समझके।
मन रहे नित्य तेरे स्मरण में न हाँ से परे, कोई क्या समझे मुझे फुर्सत ना हो तुझसे।
ख्वाब भी हो अगर तो हो उसमें तसवीर तेरी, तेरे बगैर कोई भी ख्याल लगे बकवास मुझे।
करुँ मैं तेरी सेवा दास बनके, जीवन के अनेको झंझावातों में मैं प्रभु रमा रहूँ तुझमें।
जो भी हो मेरे साथ हंसके करूंगा कबूल, पर हो मर्जी से तेरे, हम तो दर्दी है प्यार का तेरे।
मेरा झोला भरना तू अखण्ड विश्वास से, चाहे विदा होना पड़े इस तन को तेरे जहाँ से।
अट्टू बंधन में हूँ मैं तुझसे बंधा, चाहे हो जाये कुछ मैं न हो सकता हूँ तू उसे जुदा।
तेरा रूप और तेरे नाम होगे कितने भी अलग, तू न छिप सकता मेरी निगाहो से पहचान लूंगा दिल की धड़कन से।
अंजाम हो जो भी मंजूर न है दूर रहना तुझसे, होगा कितना भी बेहाल जिंदगी पर बदहाल नहीं।
हर हालत में बनना चाहूंगा तेरा, तुझसे किये हुये वाद्रे को निभाऊंगा बनके तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह