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Hymn No. 2169 | Date: 17-Feb-2001
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पीते है तेरे प्यार का जाम, जब जब मिलता है मौका।
पीते है तेरे प्यार का जाम, जब जब मिलता है मौका।
पर चाहत है दिल कर दे कुछ ऐसा इंतजाम मिले मौका सुबहो शाम।
तेरा कुछ न जायेगा इक् तड़पता हुआ तुझमें खो जायेगा।
क्या मेरी तड़प तड़प न है, जो तू कराये मुझको इंतजार इतना।
ऐसा न है जो तू देता न हो, पर बूंद बूंद से होता नहीं गलातर।
मैं तो पीना चाहता हूँ जब तक होश खो न दूं तेरी बाहो में।
ये आघा अधूरा नशा होता है अच्छा, पर तेरा मय अपना होने नहीं देता।
ये कैसी रस्म है पिलाने की, जहाँ साकी तरसाये चाहने वालों को।
प्यार है अधूरा तो वो भी करवा ले पूरा ढालके अंतर में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह