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Hymn No. 2172 | Date: 17-Feb-2001
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तेरी यादों में बिसर जाना चाहता हूँ खुदको।
तेरी यादों में बिसर जाना चाहता हूँ खुदको।
तेरे ख्वाब देखते देखते बन जाना चाहता हूँ ख्वाब तेरा।
तेरे प्यार की आग में जलना चाहता हूँ रात दिन।
तेरे बिना रहना नहीं चाहता हूँ पल भर को।
तेरी तारीफ में लिखते सुनाते गुजार देना चाहता हूँ जिंदगी को।
तेरे हर स्वरुप को देखना चाहता हूँ तुझसे।
तेरे संग झूमते नाचते हुये गाना चाहता इन वादियों में।
तेरे नजरों से पीना चाहता हूँ प्यार का जाम भर भरके।
तेरे प्यार में लगे जो भी इल्जाम कबूल है पर तू न होना दूर।


- डॉ.संतोष सिंह