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Hymn No. 2174 | Date: 20-Feb-2001
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गुनगुनाने से बढ़कर कोई शब्द नहीं प्यार के नगमे, सुनाने के वास्ते।
गुनगुनाने से बढ़कर कोई शब्द नहीं प्यार के नगमे, सुनाने के वास्ते।
यार के यादों में तड़पता दिल, मुखरित हो उठता है गुनगुनाहटों में।
अस्पष्ट से बोल भी बयाँ करते है दिल की बात दिलवालों से।
कोर कसर पूरी कर जाते है सुनते ही जो यादें संजीदा हो उठती है।
मसरूफ रहता है इतना प्यार में यार से दूर रहके रहता है प्यार के पास।
दूरियाँ रहती है लाखो गुनगुनाते दिलवाले ख्यालों में, तड़प उठता है दिलबर भी
उनको तो न होता है प्यार को तड़पाना, वो तो मिट जाते है प्यार के अफसाने बनके।
शब्दों की सीमा को लांघते हुये, सुरों में पिरोते है प्यार के गीत गुनगुनाते हुये।
यादों के कोने मैं बैठे हुये अस्पुष्ट शब्दों में गुनगुनाते है गुमसुम से गीत प्यार के।
अपने साथ रहके रहते है वो अपने प्यार के साथ अकेले गुनगुनाते।
- डॉ.संतोष सिंह
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