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Hymn No. 2175 | Date: 20-Feb-2001
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मिला दे परम् प्रभु मुझे मेरे प्यार से, बरसा देना तू कोई और सजा।
मिला दे परम् प्रभु मुझे मेरे प्यार से, बरसा देना तू कोई और सजा।
वैसी क्या हुयी थी खता जो देनी पडी तुझे इतनी कड़ी सजा।
शायद सह न पाऊँ दूजी सजा को, पर अभी तो उसके बिन जी नहीं पाऊँगा।
कबूल है मौत मेरी तो दे दे छूट इतनी, श्वासों को छोडूँ गोद में सर रख के तेरे।
माना बजा न सका तेरा हुक्म उसकी गोद में सर रखके उससे बिछुड जाने दे।
पूरी हो जायेगी बात तेरी, गाऊँगा गीत मेरी कृपालता का बनके प्यार के अफसाने।
लाखो होगे मुख गीत होगा एक, फिजा में गूँजेगा किस्सा तेरी दया का।
बुलबुले को तो फूटना ही था, हर बार कोई न कोई रोया था, इस बार विदा करा दे प्यार बनके।
खुशिया मनायेगी सारी दुनिया, कहते हुये पिता तूने इक् नयी प्रेम कथा।


- डॉ.संतोष सिंह