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Hymn No. 2176 | Date: 20-Feb-2001
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मिटा दे तू मेरे अस्तित्व को, धड़कना चाहता हूँ तेरे दिल की धड़कन बनके।
मिटा दे तू मेरे अस्तित्व को, धड़कना चाहता हूँ तेरे दिल की धड़कन बनके।
रहने न दे तुझसे कोई मेरा अस्तित्व, गूंजे वादियों में गीत तेरा बनके।
सपने हो जो मेरे कर दे खत्म तू उनको, तेरे नयनों में बसी हुयी छवि बनाके।
रहना नहीं किसी भी हालत में तुझसे अलग, थलग कर दे मुझे तेरी श्वास में बसाके।
जतन किया है तो कर्मो का अच्छा हो या बुरा, कर ले तू स्वीकार अपना बनाने के वास्ते।
मिटके भी चलना पड़े तो चलना चाहूँ उन राहो पे जो ले जाये ओर तेरे।
मैने संजोया है तुझे अपने ख्यालों में, मिटाके ढल जाने दे मुझको तेरी श्वासों में।
अस्तित्वहीन तो पहले से था, तुझसे अलग अस्तित्व लेके क्या करूंगा, कर विलीन तुझमे।
गोया ना रह गया अब कुछ जरूरी, जितना हुआ उससे ज्यादा तू है जरूरी ऐ न कोई है मुंहदेखी।
तेरे मन की नहीं जानता, मेरे मन की भी नहीं जानता, सिमट जाने दे तेरे अपरिमित मन में।


- डॉ.संतोष सिंह