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Hymn No. 2180 | Date: 20-Feb-2001
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मत छोड़ तू मुझे अकेला, मर जाता हूँ पलक झपकते बगैर तेरे।
मत छोड़ तू मुझे अकेला, मर जाता हूँ पलक झपकते बगैर तेरे।
अदना सा इंसा हूँ ना ही करता हूँ कोई बहुत बड़ी मांग।
मैं तो करना चाहता हूँ मेरे तुझे बेइंतहा प्यार ले ले तू कितना भी इम्तहां।
संवारा है आज तक, यादों ने तेरी, बिसुरती है रात ख्वाबों में।
मैं कहा रह गया हूँ अपना, अपनापन भी लगता है बेगानापन प्यार में तेरे।
तेरे वास्ते बोलना पड़ा झूंठ तो बोलूंगा, मगर दिल की सच्चाई से।
तू हो जा गैरों का कोई गम नहीं, पर तू न जाना मेरी यादों से कभी।
तू ना कर कभी कोई मुझसे वादा, पर ना करना कम प्यार तू कभी।
जीता हूँ, मरता हूँ पल पल, ठकेंरे दिल पे याद जिस तरह की छाप।
तू जांच लेना कितना भी मेरी बातों को, पर ना मांपना प्यार को।


- डॉ.संतोष सिंह