VIEW HYMN

Hymn No. 2182 | Date: 20-Feb-2001
Text Size
शराबी हो गया हूँ पीते पीते प्यार का प्याला तेरे।
शराबी हो गया हूँ पीते पीते प्यार का प्याला तेरे।
अब छोड़ना चाहता हूँ ये लत, चाहे धोना पड़े हाथ जान से।
माना की न पडा है अब कुछ, रहना चाहूँ तेरे ध्यान में।
शान मेरी मिटती है तो मिट जाये, शान मेरी तो तुझसे है।
हो जाना चाहता हूँ और आदी, जो बचा है वो हो जाये बर्बाद।
गुस्ताखी तू माफ करना, तेरी जिंदाबाद के वास्ते करूं कुर्बान जां अपनी।
गोया सब कुछ मंजूर है, मंजूरी जो आये तेरी तरफ से।
चले दौर पे दौर शेरो शायरी, थके ना हम थके ना तू।
जीवन के पल कितने भी भरे हो बदनामी से, पर तेरे प्यार से हो गुलजार।


- डॉ.संतोष सिंह