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Hymn No. 2184 | Date: 20-Feb-2001
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मत मंद पड़ने दे मेरे अंतर में, छिपे तेरे प्रेम की आग को।
मत मंद पड़ने दे मेरे अंतर में, छिपे तेरे प्रेम की आग को।
दहका दे इतनी दहक जाये इसमे मेरा सारा जीवन कोई बात नहीं।
समिधा की जरूरत है तो ले ले तू मेरे बिना पूछे।
जी सकता हूँ सबके बिना, जी नही सकता इसके बिना।
औकात तो मेरी पूछ की भी नहीं, फिर भी सौगात चाहता हूँ तेरे प्यार की।
मुझे पतित के प्यार को पावन बनाके तेरा प्यार ले जायेगा।
विश्वास को न आने देना तू कोई आंच रखना अपने पास सांचके।
दाव पे लगा दूंगा सारा जीवन, कहेगा तू कुछ और तो कर दिखाऊँगा।
साथ तेरा मिल चुका है, मत छुड़ाना अब तेरी बहियाँ।
कसके पकड़े रहना, बस जायेगा जो तू मेरी नस नस में।


- डॉ.संतोष सिंह