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Hymn No. 2185 | Date: 21-Feb-2001
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ओ। देवो के देव महादेव, हो तुम सबसे अजीब रहते हो पर दिल के करीब ओ। देवो के देव महादेव।
ओ। देवो के देव महादेव, हो तुम सबसे अजीब रहते हो पर दिल के करीब ओ। देवो के देव महादेव।
भोले हो इतना जानके अनजाने में मुराद कर देते हो सबकी पुरी ओ। देवो के देव महादेव।
डराये तुम्हारा बाह्य स्वरूप सबको, पर खींच ले भोला दिल हर इक् को ओ। देवो के देव महादेव।
अजीबो गरीब है तुम्हारा रहन सहन, पर सरलता से भरी है तुम्हारी प्रवृत्ती ओ। देवो के देव महादेव।
संसार से परे रहते हो श्मशान में, आभूषण लपेटे नाग और राखके का ओ। देवो के देव महादेव।
कोई भी भोगों की मांग नही भक्तों से, सारे आडम्बरों से परे रहते हो मस्ती में ओ। देवो के देव महादेव।
कब किस पे रीझ जाओ, ओ नाथो के नाथ कर देते हो बेडा पार उसका ओ। देवो के देव महादेव।
योगियों के हो तुम योगेश्वर, समूचा ब्रम्हाण्ड समाया है तुम्हारे लिंगमय स्वरूप में ओ। देवों के देव महादेव।
दिया शरण नाग पिशाच भूतों और न जाने किनको जिनको भगाये संसार सारा ओ। देवो के देव महादेव।
अपरम्पार है कथा तुम्हारी, क्षुद्रता से भरा है इंसान करता बखानं ओ। देवो के देव महादेव।


- डॉ.संतोष सिंह