My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 2186 | Date: 21-Feb-2001
Text Size
पत्थरों को पूजते पूजते पत्थर दिल हो गया इंसान, भगवान के साथ रहते रहते भगवान से दूर हो गया इंसान।
पत्थरों को पूजते पूजते पत्थर दिल हो गया इंसान, भगवान के साथ रहते रहते भगवान से दूर हो गया इंसान।
पहले कर्म थे कि माया न जाने कब डिगाये, जो भाव अभाव में से जन्में उसकी सजा क्यूं पाये इंसा।
सीख क्यूं नहीं पाया जब जन्मा तुझसे, हाड़ मांस का होते हो गया क्यूँ दिल पत्थर का तेरे रहते।
ताली बजती नहीं इक् हाथ से क्या ये सच नहीं अपना मन बहलाने के वास्ते जन्माया तूने इंसा को।
रचते रचते रच डाला सारे ब्रम्हाण्ड को, यह कह कि बसता हूँ मैं सर्वत्र इक सा फिर क्यूँ न नजर आये तू।
कहते तो हम बहुत कुछ है तुझसे, सुनके कैसे तू चुपचाप रहता है, ईल्जामों को भाव से लेता है तू।
बेरुखी हो गया तू क्यूं इतना, ये रूसवाई क्या थी हमारे प्रेम में जिसने जकड़ दिया तुझे अविचल बंधन में
मढ़ता हूँ तुझपे सारे दोष शायद, तू झल्लाके मारने दौड़ आये मुझे, तब हो जायेगी प्रार्थना पूरी मेरी जो थी मेरे लिये जरूरी।
जिस दूरी को मिटा न पाया मैं, वो दूरी हो जायेगी पूरी पलक झपकते तेरे जीवंत हो उठते।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
ओ। देवो के देव महादेव, हो तुम सबसे अजीब रहते हो पर दिल के करीब ओ। देवो के देव महादेव।
Next
परम्, परम्, परम्, अदा करूं तेरा शुक्रियाँ बार बार तो भी होगा कम।
*
*