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Hymn No. 2189 | Date: 23-Feb-2001
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ले चल ओ। जादूगर चला चलाके तीर नयनों के प्रेम की दुनिया में।
ले चल ओ। जादूगर चला चलाके तीर नयनों के प्रेम की दुनिया में।
बाशिंदा न हूँ इस जहाँ का, मैं तो आया था अमरता के संसार से।
हमारी दुनिया मैं बनाये हुये रिश्ते टूटते नहीं, इस जहाँ में हर जन्म में रिश्ते हैं बदलते।
जहां ज्ञान की नहीं कोई सीमा, हर कोई पुजारी है प्रेम का मेरी दुनिया वही है।
अपने पराये में नहीं कोई भेद, ईश्वर भक्तों का नहीं कोई खेल।
जिस्मानी कोई मूरत नहीं, वहाँ झलके हर सूरत पे सूरत अपनी।
गूंजते है वादियों में गीत अमर प्रेम के, छिड़ा रहता है हर पल अमर संगीत।
चलता रहता है खेल नव सृजन का, ख्वाबों की तरह मिटती है दुनिया।
अजूबे से कम नहीं दुनिया, अजूबे तो बन जाते है हम इस जहाँ में आके।
मत कर दे, कर दे विभोर प्यार में, मिट जाये गुमां तुझसे जुदा होने का।


- डॉ.संतोष सिंह