VIEW HYMN

Hymn No. 215 | Date: 17-Jul-1998
Text Size
प्रभु यहाँ भी, प्रभु वहाँ भी, प्रभु तो है सारे जहाँ में;
प्रभु यहाँ भी, प्रभु वहाँ भी, प्रभु तो है सारे जहाँ में;
नजरों के आगे बाँध रखी है, हमने इच्छाओं की पट्टी ।
तो कैसे नजर वो आयेगा, इसमें इसका दोष कहाँ है ;
बिन भूले हर पल उसे अपने मन में बसाना होगा ।
जहाँ में रोशनी है तो क्या, जब नजरों में रोशनी ही नहीं,
इस संसार को देखने के लिये, नजरों की रोशनी चाहिये ।
दिल में हो अँधेरा तो क्या फायदा, मन शांत तबही होगा;
जब दिल खुदा के हर पल करीब होगा, बनकें उसका मुरींद ।
यहाँ भी, वहाँ भी, हर जगह भटक – भटक के क्या फायदा;
जो इस जगह हैं, वो ही तो इस सारे जहाँ में है।
मंदिर – मस्जिद के दर पे जा – जाके तू क्या पायेंगा;
खुद में मन लगा ले, खुदा के करीब पहुँच जायेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह