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Hymn No. 216 | Date: 17-Jul-1998
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जो ना कर सका कोई, वो ही तो करता है मेरा खुदा;
जो ना कर सका कोई, वो ही तो करता है मेरा खुदा;
हर असम्भव को सम्भव बनाता है मेरा खुदा ।
हर पल मुस्कुराता है वो, सुख – दुःख का मज़ाक उड़ाता है वो;
मुस्कुराके जीना सीखाता है, वो अपना बनाके सबको ।
ना किसकी परवाह करे; ना ही किसी से कोई शिकवा रखे,
अपने आप में जीता है, बंद आँखों से दुनिया को है देखता ।
जो दिल से पुकारे; जो उसके चरणों में शीश नवाये;
इक् के दिल में जा बसता, दूजे को देता है सहारा सदा ।
रिझता है वो, अपने प्रेमियों के प्रेम पे, प्रेम का मारा है वो,
बाँवरा बनके दौड़े अपने प्रेमियों के पीछे, प्रेमियों से करे मुलाकात।


- डॉ.संतोष सिंह