VIEW HYMN

Hymn No. 217 | Date: 18-Jul-1998
Text Size
बस एक तू है, तू ही तू है, सर्वत्र सदा से, तेरे ही हम सब है ।
बस एक तू है, तू ही तू है, सर्वत्र सदा से, तेरे ही हम सब है ।
जिसपे तेरी कृपा हुई, उसने तेरा दर्शन किया सबमें, अंतरमन हो या कण – कण में ।
तेरी जय – जयकार होती है सदियों से, अनंतकाल तक होती रहेगी।
हम जैसे कितने आयेंगे, आकें तेरी जय-जयकार करके तुझमें शरण पायेगे ।
अनोखा है तू, तुझसा कोई दूजा नही; तेरी तुलना भी बस तुझसे की जा सकती है ।
तेरे आगे जीवन के सब रंग बेरंग है, फीके है तेरे सामने दुनिया के सब सुख।
तुझसा ना कोई रत्न है; जिसने तेरे नाम के रत्न से, है दिल को सजाया
दुनिया की सुंदरता कुछ भी नहीं उसके सामने, वैसा सुंदर तीनों लोक में नहीं ।
तेरे ऐश्वर्य के आगे देवता भी क्षुद्र नजर आते फिर मानव की क्या बिसात ।
तेरे दर्शन को तरसे बड़े – बड़े ऋषि मुनि, कृपा तेरी जिसपे हुई वो इतराया अपने भाग्य पे ।
जिसने तेरे नाम की माला अपने गले में डाली, खुद को तेरे दर के खूँटे से बाँध डाला;
उसके हर पल – पल का तू ख्याल रखें, बाँवरा बना तू उसके आगे – पीछे रहता है।
जिसने धोया तेरे चरणों को अपने आँसूओं से, उसने पायी तेरे प्रेम की अनमोल सौगात ।
इंद्र भी सौंपना चाहे अपना साम्राज्य उसे; पर वो तो तेरी चाकरी में रमना चाहे ।


- डॉ.संतोष सिंह