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Hymn No. 2192 | Date: 24-Feb-2001
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मैं कैसे भूलूं पी हुयी तुम्हारी यादों को।
मैं कैसे भूलूं पी हुयी तुम्हारी यादों को।
जेहन से उतरके समा चुकी है मेरे मातम पे।
मुश्किल है कहना, मिला न था पहले तुझसे।
विरह गीत आती है छन् छन् के, कही दूर अंतर में से।
तड़प जाता हूँ ऐसा क्या हुआ जो मिटने नही देती दूरी।
सुनी आँखो में उतर आते है आँसू, जो मिटती नही कसक।
तेरे सिवाय अच्छा नही लगता किसीको हाल दिल का सुनाना।
न जाने इक् पल में आते है कितने ख्याल लेके तुझे।
मत पूछो कहना होता है मुश्किल, दिलासा दिलाये तेरी बातें।
कर दे पूरी तू कमी आज वो, जिस कारण से तू न आये पास मेरे।


- डॉ.संतोष सिंह