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Hymn No. 2197 | Date: 28-Feb-2001
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ओ। पूरन परमात्मा, उतरे हो धरा पे बनके अवतारों के अवतार महाअवतार।
ओ। पूरन परमात्मा, उतरे हो धरा पे बनके अवतारों के अवतार महाअवतार।
सम्भालो हमारे सद्गुरू की जीवन नैय्या को, मत छोड़ो जीवन मंझधार में।
अभी तक हुये न है हम इतने परिपक्व, जो सह सके माया के थपेड़ो को।
कुछ ही देर पहले शुरू किया था घुटने के बल रेंगना, तेरे दुलारे के पीछे।
छोड़ जायेगा जो हमको वो, गुलजार होने से पहले उजड़ जायेगा चमन हमारा।
स्वार्थ भरी बातें लगी होगी हमारी, पर प्यार करना जिसने सिखाया वो मिला है तुझसे।
न करना कुछ ऐसा बिलखना पड़े जिंदगी भरे तेरे रहते हमको।
चाहिये तो लें लेना दामन से जो कुछ हो हमारे, उसके वास्ते।
बदनसीब हूँ पहले से, अब ये दाग लगने न देना मुझपे जहाँ पड़ी छाया वहाँ उमड़ दु-खो का सैलाब।
उधार का है सब कुछ पास मेरे उसके लिये तैयार हूँ खाने को ठोकर दर दर की।
रहने देना तू साथ हमारे, आंसुओं से पखारते हुये गाऊँगा गीत प्यार के आगे।
- डॉ.संतोष सिंह
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जलवे दिखाये बरपाये कहर तू प्यार में।
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मेरी कोई औकात नहीं प्यार की दुनिया में, जहाँ होते है एक से बढ़के एक परवाने।
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