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Hymn No. 219 | Date: 19-Jul-1998
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अरे गज़ब हो गया, युँ ही एक दिन खुदा से मुलाकात हो गयी;
अरे गज़ब हो गया, युँ ही एक दिन खुदा से मुलाकात हो गयी;
वो बनके इंसान आया था हमारे बीच में, ये देखने हम कैसे रहते है उसके संसार में;
देखा उसने, उसकी भी आँखों में पानी आया; दुनिया तो बस थी गमों का सैलाब;
बनके एक अदना सा इंसान, हर दुःख – दर्द को झेलके जीने लगा, वो भी हम सबके संग;
उसने देखा इस दुनिया में अमीर हो या गरीब, ग़म में हर कोई बहता नजर आया।
हौले – हौले उसने सबको अपने करीब लाया, गीत गाते हुये मुस्कुरा के जीना सीखाया;
ग़म जो परबत से लगते थे, बिन आँधी – पानी के बरसके हर तन-मन को डूबोते थे;
आज वे सब पड़ गये कमजोर, हर कोई गम में भी मुस्कुरा के जीना सीख गया;
उसने सबसे कहा, अपने आपको इतना मजबूत बनाओ खुदा में डूबके;
की खुदा को मजबूर होना पड़े, तुम्हारे सुख – दुःख का हर भार उसे उठाना पड़े।


- डॉ.संतोष सिंह