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Hymn No. 220 | Date: 19-Jul-1998
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कोई मुझसे पूछे खुदा रहता है कहाँ, तब मैं मुस्कुराऊँगा, मुस्कुरा के हौले से सर को हीलाऊँगा।
कोई मुझसे पूछे खुदा रहता है कहाँ, तब मैं मुस्कुराऊँगा, मुस्कुरा के हौले से सर को हीलाऊँगा।
फिर मैं ये गीत गुनगुनाऊँगा, गुनगुना के उसको सुनाऊँगा;
वो तो अपने प्रेमियों के दिल में रहता है, बड़े – बड़े संतों के ध्यान में होता है;
भोले – भाले बच्चो के मन में बसता है, योगियो के योग में होता है;
जो हर पल उसको भजता है, उसके भजन में वो रहता है ।
हर कण – कण को रचके बस जाता है उसमें, सुबह हो या शाम हर पल रहता है,
पशु हो या पक्षी बसमे उससे समाया रहता है, खेतो – खलिहानों में पेड-पौधें बनके झूमता नजर आता है।
आकाश हो या चाँद – सितारे हर सुंदरता में बसता है वो ।
सच–सच कहता हूँ, मेरे प्यारों, उसके बिना संसार का कोई कोना नहीं ।
उसको खोजने के लिये कहीं जाना नहीं, ना ही रखे वो किसी से गिले – शिकवे ।
वो तो विशाल है, उसी से जनमा है विशाल ब्रह्माण्ड, जिसने सच्चे दिल से पुकारा उसी पल दौड़ा वो चला आया ।
- डॉ.संतोष सिंह
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