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Hymn No. 224 | Date: 22-Jul-1998
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जब दिल – दिल से जुड़ा रहता है, तो हर बात एक सी रहती है,
जब दिल – दिल से जुड़ा रहता है, तो हर बात एक सी रहती है,
तन अलग – अलग है तो क्या से, मन के भाव एक सा रहता है ।
एक बूँद हो पानी की, या फिर भरा हो नदी – तलाबों में,
सागर से मिल जाने के बाद, सब गुण सागर के आ जाते है ।
हमारा तन तुझसे अलग – अलग है, पर मन् जिस दिन तुझमें समा जायेगा;
मैं तेरे दिल की हर एक बात जान लूँगा, खुद ब खुद ढल जाऊँगा तुझमें।
तब तेरी चाहत से ना होगी मेरी चाहत जुदा, ना कोई बंधन होगा,
ना दूरियाँ होंगी, ना ही नजदिकियाँ, तन – मन से मैं तेरा हो जाऊँगा।
तेरे अस्तित्व में हमारा अस्तित्व होगा, जहाँ तू रहेगा वहाँ हम रहेगे;
इसी बंधन में हमें बंधना है, संसार के सारे बंधन को तोड़के ।


- डॉ.संतोष सिंह