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Hymn No. 226 | Date: 23-Jul-1998
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बहुत कुछ कह गया हूँ तुझसे, ना है अब कुछ कहना,
बहुत कुछ कह गया हूँ तुझसे, ना है अब कुछ कहना,

अब जान गया हूँ मैं, हर एक दिल की बात है तू जानता ।

बनता है बडा भोला – भाला, जैसे कुछ ना है तू जानता;

हैरान कर जाती है ये तेरी अदा, इसपें फिदा हो जाते है हम ।

परेशां से रहते है, ना ही जल्दी से कुछ समझ पाते है;

फिर दिल ही दिल में तूझे समझने की करते है कोशिश ।

धीरे – धीरे दिल जुड जाता हें तुझसे, समझ आ जाता है सब कुछ;

तब तेरा राज हमारा राज होता है, लब पे मुस्कान आ जाती है।

समझ आ जाता है करूणा क्यों होती है तेरी आँखो में सबके लिये,

क्यों दुनिया भरके गम को तू अपना गम समझता है, प्रवर रहता मदद के लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह