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Hymn No. 227 | Date: 23-Jul-1998
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क्या जलवे होगे आजतेरे, झूमता होगा, झूमा देता होगा,
क्या जलवे होगे आजतेरे, झूमता होगा, झूमा देता होगा,
महफिल में रंग जमाके तू आनंद से साराबोर कर देता होगा ।
सोचके मन में आनंद आ जाता है, रोम रोम मेरा पुलकित हो उठता है;
अपनी हर विचार पे विराम लग जाता है, बस मजा आ जाता है।
ऐसा लगता है की हम भी पहुँच गये वहाँ पे भले ये है कल्पना मेरी;
या गलतफहमी, पर यह सच है, उस वक्त मज़ा आता रहता है हमको।
हम अवाक् से रह जाते है अस्पष्ट सा तू नजर आता हैं हमारे ख्यालों में;
तेरी यें अदा हमको घायल कर जाती है सुन्न से हो जाते है हम ।
मिलन तो विराम है, वहाँ हर चीज का अंत नजर आता है;
विरह में तो प्यार है दीवानगी की हर सीमा टूट कर जुनून छा जाता है।
मैं तो हर पल तेरे लिये तडपना चाहूंगा, दिल ही दिल में रोना चाहूँ;
लब पे मेरे मुस्कान हो, दिल को तेरे यादों का नश्तर सदा चुभौता रहूँ,
मुझे ना तूझे खोना है ना पाना है, यूँ ही तेरे यादों में गुम हो जाना है।


- डॉ.संतोष सिंह