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Hymn No. 236 | Date: 28-Jul-1998
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मोह लेती है तेरी मोहनी सुरतिया नींद आयी, नींद में, नींद के बाद बस तूझे देखे ।
मोह लेती है तेरी मोहनी सुरतिया नींद आयी, नींद में, नींद के बाद बस तूझे देखे ।
तेरे आगे सब झुठ है, बनता है, मिटता है, हर पल – पल रंग बदलता है ।
समर्पण कर देने को जी करता है, कुछ भी गँवारा लगता नहीं तेरे आगे ।
बिन पाये तुझेमें मन बौरायें इतना, पाने पे मेरा न जाने हाल क्या होगा
कहीं भी जाये तन मेरा, पर मन भटके तेरे ख्यालों में ।
हर पल तेरे करीब आना चाहे, सब कुछ छोडके तेरा हो जाना चाहे।
मैं कैसा मर्ज है समझ न पाऊँ, पर उससे में ना पी छुडाऊँ।
इस मर्ज के फंदे में फंसके, तन – मन को कैद करके, तूझ तक पहुंच जाऊँ।
ना परवाह तेरे आगे किसीकी, तू खुश है तो सब खुश है ।
अपना तो बस एक ही सहारा, सब रिश्ते – नाते से परे वो परम् प्यारा है ।


- डॉ.संतोष सिंह