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Hymn No. 237 | Date: 28-Jul-1998
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बढ़ जायेगे, बढ़ जायेगे, बढ़ जायेगे तेरा आशीष पाके तुझ तक हम बढ़ जायेगे ।
बढ़ जायेगे, बढ़ जायेगे, बढ़ जायेगे तेरा आशीष पाके तुझ तक हम बढ़ जायेगे ।
सड जायेगे, सड जायेगे, सड जायेगे दुनियादारी में उलझके, तुझको भूलकें, यहीं पे हम सड जायेगे।
लड़ जायेगे, लड़ जायेगे, लड़ जायेंगे परमपिता तेरा सहारा पाके हम अपनी इच्छाओ से लड़ जायेगे।
हर जायेगे, डर जायेगे, डर जायेगे मन की करते – करते, होश ना रखेंगे खुदका, खुदा से डर जायेगे।
खा जायेगे, खा जायेगे, खा जायेगे खुदकी कमियों को दूर करने के लिये खुद ही उसे खा जायेगे।
जुदा हो जायेगा, जुदा हो जायेगे, जुदा हो जायेगे तुझे पाने के लिये जुदा होना पड़ा तो सब अवगुणों से जुदा हो जायेगे।
जायेंगे, जायेंगे, जायेंगे जो – जो स्थान तेरी यादों से जुडी है, वहाँ हम जरूर जायेगे ।
मर जायेंगे, मर जायेंगे, मर जायेंगे तुझे पाने के लिये मरना पड़ा तो हम जरूर मर जायेगे ।


- डॉ.संतोष सिंह