VIEW HYMN

Hymn No. 238 | Date: 28-Jul-1998
Text Size
कभी – कभी उदास हो जाता हूँ, खुदा तेरी कई बातें समझ नहीं पाता हूँ;
कभी – कभी उदास हो जाता हूँ, खुदा तेरी कई बातें समझ नहीं पाता हूँ;
तेरी रजा क्या है, क्यों दी है तूने हमको इतनी लंबी सज़ा।
दूर रखता है तू हमको, क्या हम खुदही पास आना नहीं चाहते तेरे;
तुझमें हमारा विश्वास इतना कम क्यों, रम जाते है तेरी सत्ता में पता भी नहीं चलता।
तेरी सत्ता देखते है हर पल, फिर क्यों तू नजर नहीं आता हमको;
पल में बदल जाता है ये जग, ढल जाते है हम भी, बचपन – बुढ़ापे में बदल जाता है ।
लाख समझना चाहते है तुझको, पर बिलकुल समझ नहीं आता;
तेरे सहारे खुदको छोड देना चाहते है; फिर क्यों होश आ जाता है अपनापन का।
हिम्मत नहीं हारेंगे हम, इस ज़माने में रहके होश खो देने तक;
तुझे पुकारा करेंगे, दम ना लेंगे तब तक, जब तक तेरा सहारा ना मिलेगा।


- डॉ.संतोष सिंह