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Hymn No. 239 | Date: 28-Jul-1998
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हार न मान तू किसीके आगे, तुझे तो सहारा है सद्गुरू का।
हार न मान तू किसीके आगे, तुझे तो सहारा है सद्गुरू का।
भाग्य में सब कुछ है तो क्या, उसके बिना अधुरा है भाग्य हमारा।
वो ही तो रचता गढ़ता है अपने प्यारे पुत्रो को, जो शरण में रहते है उसके ।
संसार में एकमात्र सहारा उसका है, बाकी तो सब है बेसहारे ।
हील – हुज्जत तू करना सबसे, आँख मूँदके बात मान लेना सब उसकी।
जो वो जानता है बता न सकता कोई, परखने की ना तू कोशिश करना ।
ईश्वर का दर्शन पाना महज संयोग है, सद्गुरू का मिलना उसकी कृपा का योग है ।
बेमानी हर शब्द उसके आगे, एक बार जो जुड़ा तू उससे, सब भरेंगे पानी ।
आहत होना खुद, आहत ना करना अपने दिल को, जिंदा दिली से बताये हुये कर्तव्य पथ पे आगे बढ़ना।
पुरस्कार मिला है तुझको सबसे बड़ा जो सद्गुरू का साथ मिला।


- डॉ.संतोष सिंह