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Hymn No. 240 | Date: 28-Jul-1998
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कितना अपनापन लगता है तेरे संग मुझको,
कितना अपनापन लगता है तेरे संग मुझको,
मेरे मन को तू भाता है लुभाता है सदा से ।
सताया है तूने बहुत बार मुझे फिर भी ना भुला पाता हूँ तुझे ।
रहूँ चाहे दूर कितना भी तुझसे, हर घडी दो घड़ी बाद याद आये तू मुझे
बदलते रहे है जीवन के संग, हर रिश्ते – नाते सबसे ।
तेरा – मेरा एक ही रिश्ता है न जाने कबसे ।
ना ये नया है ना ही पुराना, ये तो आनंद से भरा – भरा है।
अघूरा है मेरा जीवन बिन तेरे, चलती ना है कीसीकी मुझपे तेरे आगे ।
लायक तो ना है तेरे, प्यार ने काबिल बनाया है हमें ।
हमारे बस में ना है छोड़ना दामन तेरा, तू चाहके भी ना कर सकता है ऐसा।
- डॉ.संतोष सिंह
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हार न मान तू किसीके आगे, तुझे तो सहारा है सद्गुरू का।
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