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Hymn No. 241 | Date: 29-Jul-1998
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कब ना, हाँ में बदल जाती है, ये तो सद्गुरू ही जाने ।
कब ना, हाँ में बदल जाती है, ये तो सद्गुरू ही जाने ।
हमें तो बनना है, उस रज्जू की तरह जो धिसते – धिसते निशा छोड जाये कुएँ की सख्त गडारी पे ।
वक्त की ना चिंता हो, मन मे बस विश्वास हो, दिल श्रध्दा से ओत-प्रात हो
उसकी हाँ में हाँ हो, नज़र सदा उसके चरणों में रहे ख्याल ।
उसके इशारे पे हर कार्य करना, कोई भी कार्य करने से पहले उसको प्रणाम करना।
अपना सर्वस्व उसको सौंपना, चाहे क्षय हो जाये इस तन-मन का पर उफ् तू ना करना
पाने के ख्याल से दूर बस एक ही रट् रखना, क्षण हो चाहे गम और खुशी का तू भावों में ना बहना ।
अपना ध्यान उसपे रखना, हर रिश्ते - नातों को निभाते हुए जुड़े रहना उससे ।
कठिन से कठिन परीक्षा लेगा वो तेरा, परीक्षाओं की परवाह कीये बिन तू उसको याद करना
तिगनी का नाच नचायेगा, पर तू ऐसा नाचना कि वो है संग तेरे ।
ना ही तू आशा कर, ना ही तू निराश हो, हर पल बिन भूले तू याद कर उसे ।
जुडने को तो सब ही है उससे जुडते, तू ऐसा जुड जान उससे जैसे पानी में पानी मिल जाय।


- डॉ.संतोष सिंह