VIEW HYMN

Hymn No. 242 | Date: 29-Jul-1998
Text Size
मैं नहीं कहता पर ये सब कहते है, परम् हमारे संग धरती पे रहते है;
मैं नहीं कहता पर ये सब कहते है, परम् हमारे संग धरती पे रहते है;
मैंने नहीं देखा, पर संतों ने देखा है, तेरा दर्शन हर कण में किया है ।
मेरा विश्वास है इसीलिये उन्होंने ब्रम्हमय जगत कहाँ है;
तू कीतना भी खेल दिखायें, मेरे विश्वास को बार – बार हीलायें ।
मैं नहीं हम सब में मानते है, परम् परमात्मा रहते है संग हमारे;
तू कीतना ढंक – छूपा लें अपने आप को, क्या बादल सुरज को ढक सकता है सदा के लिये
तू जहाँ भी रहे, इस जहाँ में तेरे मतवाले तेरी खुशबू पाकें पहूंच जायेगे तुझ तक;
इक् बात तू बता दे, क्यों हैरान करता है तू हमें, क्या तुझे इसमें आता है मज़ा ।
ये ना कोई शिकायत है ना ही शक ओ – शुबह, बस हम यूँ ही पूछते है ।
तेरी मर्जी है, ना कोई मुझे जल्दी है, जब जवाब सुझेगा तेरे दिल में, मैं खुद ही समझ जाऊँगा।


- डॉ.संतोष सिंह