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Hymn No. 2403 | Date: 25-Jul-2001
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अरे देखो रे देखो तमाशा, न मिलेगा इससे बढिया मौका देखने का तमाशा।
अरे देखो रे देखो तमाशा, न मिलेगा इससे बढिया मौका देखने का तमाशा।
एक संसारी निकला पग रखके, दो नावों पे मजिल की ओर, अरे...
इक नाँव से पार करना होता है मुश्किल, दो-दो को तो कोई मुर्ख ले चले, अरे...
छोटा सा भी झोंका आये पवन का, तो प्रभु-प्रभु का विलाप करने लगता, अरे...
बड़ी बड़ी बातें हो गयी इक ओर, जब जीवन की नैया होने लगी डांवाडोल, अरे...
विश्वास की पतवार जो कसके न पकड़ी, तो इच्छाये बहायेगी न जाने किस ओर, अरे...
कृपा होते हुये पुरूषार्थ का पाल मोड़ने न आया, सही दिशा की ओर तो कौन लगाये पार अरे...
हिचक के थपेड़े लगने पे, मन के भंवर में फंसके बहती है नैया गोल, गोल, अरे...
रखा होता तो रखता हौसला बुलंद, डूबके या तैरके पास पहुचेंगे पास तेरे, अरे...
जब कीया है कृपा तो कितना भी कहर बरपे, पर बिगाड़ न पायेगा कोई भी कुछ अरें...


- डॉ.संतोष सिंह