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Hymn No. 2407 | Date: 30-Jul-2001
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बिताये न बीते तोरे बिना, काटे ना कटे पल लगे परबत से।
बिताये न बीते तोरे बिना, काटे ना कटे पल लगे परबत से।
मन में छाया है घनघोर अंधेरा, किस बात की अब देर है।
दिल में उछले तोरे प्रेम की लहर, तो क्यों न बहे तेरे प्रेम का ज्वार।
अर्पित कर दिया सब कुछ, तो क्यों है कमी समर्पण में मेरे।
बताना चाहता हूँ बात दिल की, आड़े आये क्यों मन मेरा।
तू कब तक टालता रहेगा हंसके, पूरी करवा ले बांधके प्रेमपाश में अपने।
आकार ले रहे है न जाने कितने भाव, साकार कर दे अप्रित प्रेम से।
बढ़ते हुये भावों को न अब बांध प्रारब्ध की जंजीरो से।
सारी सीमाओं को तोड़ दे परम प्यार की अनोखी छड़ी से।


- डॉ.संतोष सिंह