Hymn No. 2408 | Date: 30-Jul-2001
सवालों के बाद तो जवाबों की बात, चलता है दौर तेरी महफिल में।
सवालों के बाद तो जवाबों की बात, चलता है दौर तेरी महफिल में। कहता है कोई अपने मन की, कोई सुनाये अपने दिल की, हर कोई सुनाना चाहे अफसाने प्यार के। कोई रोते हुये है आता, कोई हंसते हुये है आता, पर जाता है हर कोई मुस्कराते हुये कोई मुश्किलों से है उपर, कोई मुश्किलों में है कैद, नामुमकिन को मुमकिन बनाना सीखाता है तू। खेलता है खेल किसी का कर्म, तो किसीकी किस्मत, इनसे ऊपर उठके पुरूषार्थ का पाठ पढ़ाये तू। निराशाओं का अंत करे, तो मस्ती की शुरूआत तो तुझसे, जीवन के हर पहलू में रहना इक सा सिखाये। कोई कामनाओं के पाश में है जकड़ा तो कोई उसपे बैंठक लगाये, सबकी तू आहिस्ता आहिस्ता रहमत बढ़ाये। कोई बताये विचारों को, तो कोई गाये नगमों को, तेरे अंतर की बात निकले हर दिल से। हारा हुआ भी करे प्रयास, जीता हुआ भी रहता है अडिग, तेरे पास आके मिले सबको एक ढिकाना। राह है सबकी जुदा जुदा, ओर चलने का तरीका अलग अलग, परअंजाम है निश्चित एकसा सबका।
- डॉ.संतोष सिंह
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