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Hymn No. 2409 | Date: 03-Aug-2001
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मस्त मैं, मस्त तू, मस्त है सारी दुनिया।
मस्त मैं, मस्त तू, मस्त है सारी दुनिया।
मस्ती देखके हमारी असमजस में पड़ जाती है दूनिया।
अंदाज बयां होता है मस्ती का, नजरो से हमारी।
रोम रोम है झूमता हर पल, जो घायल रहता हूँ यादों मे तेरी।
अंदाज बयां करना मस्ती का है नामुमकिन।
मन पे जो छाया रहता है, हर पल प्यार का जलना।
कभी आता है तूफां कामनाओं का, तो कभी घिरता हूँ इच्छाओं की आंधियों में।
हिचकोले जरूर खाता हूँ, पर ना खोता हूँ मस्ती दिल की।
किसी के दिल को दुखांना आदत नही है मेरी।
ओढ रखी हूँ जन्म से जो बेफिक्री की चादर।
चलती है जिदगी की नाव जो तेरे प्यार के सहारे।
तरन्नुम में झूमता हूँ यूं ही तेरे ख्यालों में रहते।
मौज आती है जब अपने आपको दुःखों में डूबते देखता हूँ।
धीरे धीरे दिल से बाते करके, तेरा पता तब पूछता हूँ।
कदम दर कदम पे आ रही है, न खत्म होने वाली कठिनाई।
हर हाल में सुगम बनाये जा रहा है तेरा प्यार मेरे मन को।
अकेले रहने पे खोजता हूँ तुझे पास अपने।
तो तू कहता है हंसके, अरे पागल ये मस्ती आई कहां से।
मुकाम बनाता जा रहा है धीरे धीरे कायम का तेरी मस्ती का।
हर हाल पे अपने जो प्यार आता है बहुत तुझपे।


- डॉ.संतोष सिंह