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Hymn No. 2414 | Date: 05-Aug-2001
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छा रहा है दिल पे प्यार का जोर धीरे धीरे, ले रहा है आगोश में तन मन को।
छा रहा है दिल पे प्यार का जोर धीरे धीरे, ले रहा है आगोश में तन मन को।
कर रहा है मन से सारे कयासों का अंत धीरे धीरे, सुनिश्चित करता जा रहा है जीवन का गतव्य।
रोना रोता नही मसरुफ होता जा रहा है यार के ख्वाबों में, धीरे धीरे दौर हो जीवन में अब कोई ।
सिला जो भी मिले रंगता जा रहा है यार की रंगत में धीरे धीरे, तरसता है वो प्यार के संग को।
यार की इक नजर जो मिल जाती है प्यार से खिल जाता है दिल, उतरता नशा हो जाता है तारी।
न जाने क्या क्या होता रहता है हर पल प्यार में धीरे धीरे, नामुमकिन है हर बात बयाँ करना।
अब तो लगी जो चोट दिल को दर्द होता है दूजे को मीठा मीठा, रहा न वो दौर जो होता जा रहा हो कुछ।
अंत हो रहा है अंतहीन यात्रा का धीरे धीरे, जो मिल गयी अनंत राह प्यार की।
कायम है जो जज्बा ले जा रहा है मुकाम पे धीरे धीरे, खुद को लुटते देख मजा जो आ रहा है।
खुमारी उतरने का नाम नहीं लेती चाहे हो कुछ भी हार जीत का मजा जो हो गया है इक सा।


- डॉ.संतोष सिंह