Hymn No. 2415 | Date: 08-Aug-2001
मुहब्बत, मुहब्बत, ऐं मुहब्बत, मुहब्बत है .. ऐ मुहब्बत..।
मुहब्बत, मुहब्बत, ऐं मुहब्बत, मुहब्बत है .. ऐ मुहब्बत..। मुहब्बत के सिवाय चाहे न जिक्र किसीका दिल, मुहब्बत, मुहब्बत, मुहब्बत। सुबह हो या शाम हर पल हो गुलजार मुहब्बत से, मुहब्बत, मुहब्बत। सोहबत है किसीकी मुहब्बत बगैर बेमजा है, मुहब्बत, मोहब्बत कुर्बान हो जाने का जज्बा कायम रहता है मोहब्बत में, मोहब्बत, मोहब्बत जुनून कहो या दीवानगी हद से गुजर जाना चाहे, मोहब्बत, मोहब्बत कितना भी करे कोई न, मौका मिलने पे करना चाहे हर दिल, मोहब्बत, मोहब्बत... निभाना सबके वश की बात नहीं, आता है किसी दो चार को मोहब्बत करना, मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत तो है खुदा की नियामत, जो चले इस राह पे वो पाये खुदा को मोहब्बत, मोहब्बत
- डॉ.संतोष सिंह
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