VIEW HYMN

Hymn No. 2419 | Date: 11-Aug-2001
Text Size
है किशन लिया था तूने इक् जन्म, पर समाये थे सारे गुणं।
है किशन लिया था तूने इक् जन्म, पर समाये थे सारे गुणं।
कह लो चाहे कोई भी कथा, अधूरी है वो तेरे बिना।
छेड़ी थी तूने मुरली का तानं, तर गया जो सारा संसार।
भेंद मिट गया नजरों का, बंध गये जो सारे प्रेम बंधन में।
ऐसी रास रचायी, इक साथ न जाने कितने दिलो की प्यास बुझाई।
निभाना कोई तुझसे सीखे, दोस्ती हो या कोई ओर रिश्ते।
वख्त पड़ने पर तूने क्या न किया, व्यवहार ओर प्रेम का गूंथा इस जीवन में।
हर एक को तूने अपनाया, अपनो के सारे सपनो को जो तू सच कर दिखाया।
है निर्गुण निराकार किस कारण से हूआ था तू साकार हमको तू बता दे।
कर न सके तो, कह तो सकते है इक बार फिर से आने को प्यार से करके दिखाने को।


- डॉ.संतोष सिंह