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Hymn No. 2421 | Date: 16-Aug-2001
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बात है ये तो दिल की, नजरों से उतरके दिल में समा जाने की।
बात है ये तो दिल की, नजरों से उतरके दिल में समा जाने की।
कह लो कितना भी, जब तक मन को माफिक आता नहीं मिलता नही चैन।
बिसुरते रहते है यादों में, हक जो लगती है हाँ या ना कि दिल को।
वो तो रहते है अपने अंदाज में, कयासों का जन्म देते है लोग।
परवाह रहती नहीं है किसी की, करता है परवाह तो अपने प्यार की।
चैन पाता है प्यार के कसीदे पढने में, जो बरबस बह उठते है अश्क।
रसूले प्यार में पग पगके वो बन जाते है मिसाल प्रभु प्यार का।
होता है वो सब कुछ फिर भी बेचैन नहीं बनता, बेचैन नहीं बनता, बेचैन तो रहता है प्यार में।
अंजाम चाहे जो भी हो, निभाता है हर हाल में किया हुआ वादा अपना।
वख्त रहते जो पाते है अंजामे प्रभु प्यार का, बाकी तो मिल जाते है खाक में।


- डॉ.संतोष सिंह