My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 2425 | Date: 23-Aug-2001
Text Size
देखा मजिल की ओर, जा रही थी कई राहे।
देखा मजिल की ओर, जा रही थी कई राहे।
कोई विचारों से चलता जा रहा था लगातार।
तो कोई भावों की नैय्या से तैरते बढ रहा था।
कोई बारम्बार जपते हुये अपनी धूनं में गा रहा था।
तो कोई आनंदमग्न होके अपनी तपस्या में जी रहा था।
कोई था मग्न ध्यान में, चुपचाप करता जा रहा था प्रयास।
तो कोई जग में रहके, गीतों को सुरों में पीरो रहा था।
कोई साध रहा था अपने आपको, योग के अनरूप बढने के वास्ते।
राहें भले अलग अलग थी, पर दृडनिश्चयी थे सबके सब।
होने ना दे रहे थे किंचीत भी विलंब, अडिग थे अपने पुरूषार्थ में।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
प्रभु जी तू कैसे सहता है हमको, ध्यान नहीं देते रों में बहके न जाने क्या कुछ कह देते प्रभु।
Next
जब प्रभु की बात होगी, तब प्रभु की बात होगी।
*
*