VIEW HYMN

Hymn No. 2427 | Date: 26-Aug-2001
Text Size
दिल चाहता है हर बात कहे तुझे मन की।
दिल चाहता है हर बात कहे तुझे मन की।
जो न जाने क्यो क्या गुल खिलाता है तेरी यादों में रहते।
समझाना चाहे समझ न पाये बह जाते है तुझे देखते।
जोर जो बहुत संजो संजोके लेके तेरे पास आया, भूल जाऊँ तेरे सामने आते।
न जाने ऐसा कैसा जादू है, होश रहते होश मे ना रहने दे।
अब तो आता है मजा ओर दिल गुनगुना के कहे थोडा ओर।
दाद पे दाद देता हूँ दिल से, बिना कहे जो ना कुछ होता है।
ओर जो कुछ हो गया तो दिल से आवाज देता हूं।
दिल की बात को दिल में रहते जानके तूने बिना कहे अंजाम दिया।
दिल की ही तो बात है, जो दिल ने जान ली ओर मान ली।


- डॉ.संतोष सिंह