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Hymn No. 2428 | Date: 27-Aug-2001
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रूसवाइयों का दौर खतम होने का नाम नहीं ले रहा है।
रूसवाइयों का दौर खतम होने का नाम नहीं ले रहा है।
दिन ब दिन प्यार के बजाय, बन रहे हैं हालात दिल्लगी के।
जो मस्ती रहती थी तेरी हर पल, अब खोजने पे मिलती नहीं।
तरसते मन को चैन नहीं मिलता, करुँ कितना भी दीदार तेरा।
दे देना तू लाख सजा बेंवफाई की, पर मत दूर कर तू अपने से।
जिंदगी गुजरती जा रही है हर पल, पलों को महका दे तेरे प्यार से।
आरजू इतनी है श्वास खत्म हो जाये, पर खत्म ना हो प्यार का जोर।
दौर की वो अभी हुयी तो शुरूआत, खत्म ना हो पैमाना कभी।
कायम रहे तेरे प्यार का नशा, जानम बनके समा जाऊँ दिल में।
हसरतों का कोई मतलब नहीं, सब हसरतों से परे जो तू है।


- डॉ.संतोष सिंह