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Hymn No. 2429 | Date: 28-Aug-2001
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जीता हूँ कल्पनाओं में अपनी प्यार करते तुझे।
जीता हूँ कल्पनाओं में अपनी प्यार करते तुझे।
होता हूँ जब उदास तो दौड़ता है मन तेरी ओर।
खुशियों में सबसे पहले याद आता है तू मुझे।
दौर एक के बाद एक कोई ओर आये, अहसास रहता है तेरा दिल को।
किसी ना किसी बहाने जुड़ रहता हूँ, यादों से तेरी।
हर बात अपनी कहने को चाहता है मन तुझसे।
गुजरने को गुजरती है जिंदगी बगैर तेरे, पर आता नही मजा।
खुद से झगड़ता हूँ कई बार क्यों नही मजबूर करता हूँ तुझ।
जब तय हो मिलना, तो क्यां कारण जन्म लेते है प्यार में।
अब ना रहना है एकाकी, तेरे रहते सिमट जाना है तुझमें।


- डॉ.संतोष सिंह