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Hymn No. 2431 | Date: 02-Sep-2001
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सींच दे प्रभु मेरे हृद्य को तेरे प्यार से, फूटेंगी जो कोयल प्यार की।
सींच दे प्रभु मेरे हृद्य को तेरे प्यार से, फूटेंगी जो कोयल प्यार की।
चढाऊँगा तेरे चरणों में, इजहार करुँगा तुझसे अपने प्यार का।
निगाहों से निगाह मिलाके लबालब भर दे प्रभु तेरा अप्रितम प्यार मुझमें।
निगाह जब जब टकरायेगी तो विवश कर दूंगा तुझे साथ रहने को अपने।
पैदा कर दे प्रभु मेरे स्वरों में कशीश प्यार की, जब जब गूंजे विवश हो जाये गाने को तू।
जोड दे प्रभु मेरे मन को तेरे अपरिमित मन से, जग में रहके जो सदा के वास्ते जुडे जाये तुझसे।
भर दे प्रभु जी मेरा तुझमें परम ज्ञान, जीवन के हर दौर में अविचलित हुये बिना निभाऊँ तेरा कार्य।
पान करा दे प्रभु जी तेरे प्यार का इतना, किस्मत ओर कर्मों से उपजे सारे विवशताओं को तोड़के रमता रहूँ तुझमें।
प्यार का प्रभु तू दे दे अथाह भंडार, हर हालात में भाव विभोर करता रहूँ तेरे दिल को।
बढा दे प्रभु तू प्यार का जोर इतना, श्वासों के लोप होने से पहले प्यार बनके लोप हो जाऊँ तुझमें।


- डॉ.संतोष सिंह