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Hymn No. 2433 | Date: 04-Sep-2001
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मत रोक दिल में उठती हुई तरंगो को, उदात्त होके बहने दे।
मत रोक दिल में उठती हुई तरंगो को, उदात्त होके बहने दे।
मन में संजोये सारे चिर सपनो को पूरा होने दे।
बीते न जाने कितने जन्म, छूटा न पीछा किये हुये कर्मों से।
तोड़ दें मेरी उदासीनता की बेड़ियाँ, इक बार फिर से आतुर हो जाने दे।
दिलो दिमाग पे फिर से तेरे परम प्यार को छा जाने दे।
मत देखं पीछे के कारण बरसाते जा तेरी अनमोल कृपा।
खोने आया हूँ सब कुछ तेरे पीछे, किसी ओर कारण से महफूज न होने।
पूरा हो जाने दे सारे ख्वाबों को, फिर से न जन्म ओर लेने दे।
बहे चाहे खून या अश्क, पर राह की सारे अवरोध दूर हो जाने दे।
प्रेम की दुनिया में सदा के लिये अमर हो जाने दे।


- डॉ.संतोष सिंह