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Hymn No. 2435 | Date: 06-Sep-2001
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टूट जाये चाहे श्वासों की डोर, तू न मुझसे कभी रूठना।
टूट जाये चाहे श्वासों की डोर, तू न मुझसे कभी रूठना।
लिया है जीवन तेरे वास्ते, न ही यूं ही जिंदगी जीने के वास्ते।
मेरे वश में नहीं बहुत कुछ, पर तेरे वश में तो है सब कुछ।
अनामी होके देता है तू नाम, नाम रहते हो जाते है हम गुमनाम।
आसरे है तेरे सारा संसार, तू नहीं किसी के सहारे।
उपजता है हर पल तुझसे ही सब, उपराम पाये तुझमें ही सब।
दूर रहके तू सबसे करीब, तेरी रहमत पे है दुनिया खड़ी।
घड़ी भर है जिंदगी में घड़ी भर के लिये जो मिल जा तू।
अचूकों की मोतियो से भर दूंगा, तेरे चरणों को प्यार से।
सारे सपनों को सच करने के वास्ते करुंगा गुजारिश चरणों में।


- डॉ.संतोष सिंह