VIEW HYMN

Hymn No. 2437 | Date: 07-Sep-2001
Text Size
इन नजरो के क्या कहने, कभी बरसाये प्यार तो कभी कयामत ढाये।
इन नजरो के क्या कहने, कभी बरसाये प्यार तो कभी कयामत ढाये।
हर पल होता है इनका अलग ही जलवा, भेंद जाये जो हमारे दिल को।
कभी इनके पास आके मिलता है सकून, जो हर लेती है मन की पीड़ा।
तो कभी झेल नही पाते पल भर को, जो कुछ ऐसा वैसा करके है आते।
पर बरसाती है प्यार सदा, कुछ पल के लिये भूल जाते है जीवन व्यथा।
न होने पे याद बहुत आती है, तब किसीकी नजरों में से झांकती है।
हारे हुये को जोश से भर देती है, दुःखी मन को डूबके टटोल लेती है।
सताती है अपनी शरारत से, पर हौंले हौंले मस्ती से चूर कर देती है।
कैसे बताऊँ कौन सा सलूक नहीं है करती, पर हम भी रह नहीं पाते इनके बिना
दिल को भाती है बहुत, मिलके बिछुड़ने पे दिल पे कहर ढाती है।


- डॉ.संतोष सिंह