VIEW HYMN

Hymn No. 2438 | Date: 12-Sep-2001
Text Size
प्रभु ले चल तू मुझे विश्वास की गलियों में, जहां हो प्रेम का साम्राज्य।
प्रभु ले चल तू मुझे विश्वास की गलियों में, जहां हो प्रेम का साम्राज्य।
पूरी हो जाये जहाँ दिल की हर बात, भेद न हो नजरों का नजरो में।
हर मन ओत प्रोत हो श्रध्दा से, बरसाये नजरों से करुणा तू हम सबपे।
छाँव मिले ममता की, जहाँ कही जा सके हर बात दिल की बेहिचक।
चले न चाल कभी चालाकी की, नटखटता से भरी हो चाहे कितनी भी मस्ती।
प्रेम में बड़ा न हो कोई रिश्ता, अंतर भरा हो सहजता सरलता से।
दुःखों का सैलाब बुझा न सके मन को, आये उसमें भी हमको मजा।
रोक टोक जैसी कोई बात न हो, हर लम्हा गुजरता जाये मस्ती में।
सवार हो हर पल प्यार की कश्ती में, जिंदगी के सागर में खाये नैया हिचकोले तो क्या ।
हौले हौले तू ले ले प्यार की गिरफ्त में इतना, अहसास ना हो कुछ ओर दूजा।


- डॉ.संतोष सिंह