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Hymn No. 2439 | Date: 16-Sep-2001
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ऐ मालिक रोशन है जहां तेरे प्रकाश से, रोशन कर दे तू मेरे दिलको।
ऐ मालिक रोशन है जहां तेरे प्रकाश से, रोशन कर दे तू मेरे दिलको।
तेरी कल्पनाओं से उपजी है दुनिया, मेरे ख्वाबों में भर दे तेरे प्यार के रंग ।
रमता है तू अपनी मौज में चाहे होता रहे कुछ, रम जाने दे हमको तेरी मस्ती में।
करता है लीला हर युग में तू कुछ नया नया, रचा ले तू हमसे प्रेम रास जरा।
करके भी तू सब कुछ रहता है निश्चिंत सदा, टपका दे निश्चिंतता की बूंद हमारे मन पे।
दुनिया में रहके दुनिया न बन जाऊँ, ऐ मालिक रंग दे तेरे प्रेम रंग में इतना।
इस पूत को भर दे अकूत शक्ति से तेरी, तेरा कहा कर जाये पलक झपकते वों।
रहूँ चाहत में अपने डूबे सदा इतना, पल भर को तू दूर चाहके भी न जा पाये हमसे।
भले तेरी हस्ती से जुदा होके बनी है मेरी हस्ती, पर मालिक रहना तू मेरी मर्जी का।
नजर नजर से ओझल रहना तू कितना भी, पर ओझल न होना मेरे दिल से कभी।
- डॉ.संतोष सिंह
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प्रभु ले चल तू मुझे विश्वास की गलियों में, जहां हो प्रेम का साम्राज्य।
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