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Hymn No. 2442 | Date: 18-Sep-2001
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राह अनजान जरूर है, पर खैरवार तो साथ है।
राह अनजान जरूर है, पर खैरवार तो साथ है।
हाथों में हाथ है, कदम दर कदम ले चल रहा है वो साथ।
दिल तो प्यार में मशगूल, पर अनजान नहीं राह की कठिनाइयों से।
मन में विश्वास है, पार पाऊँगा जीवन के हर हालातों से।
न कोई सोच है न विचार, प्यार के सिवाय अंतर में न कोई बात है।
रीत बदल रही है जीने की, जीना है जो अब बस यार के वास्ते।
अधीरता बढ़ती जा रही है, मुकाम पे पहुँचने की।
पानी नही फिरने देना चाहता हूँ, यार के किये हुये प्रयासों पे।
विशाल मन को सौंप देना चाहता हूँ अनंत दिल के हाथो में।
चाहे हो जाये कुछ भी जीवन में, पाना चाहता हूँ अंजाम को।


- डॉ.संतोष सिंह