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Hymn No. 2448 | Date: 22-Sep-2001
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मां.. पूरी करवा ले मुझसे हर वो साध, जो तूने सोंच के रखी है दिल में अपने।
मां.. पूरी करवा ले मुझसे हर वो साध, जो तूने सोंच के रखी है दिल में अपने।
कब तक दूंगा इंतजार का इम्तहाँ, खातें हुये ठोकर कर्मों के अपने।
ख्वाबों में नही गुजारना चाहता हूँ जिंदगी, जीते जी पूरा करना चाहता हूँ ख्वाबों को तेरे।
किस्मत का रोनां क्यों रोऊं तेरे आगे, अश्क भी गिरते है तेरे बिछोह में।
बातों का अफसाना बहुत सुनाया, अब तो पहनना चाहता हूँ पुरूषार्थ का जामा तेरे हाथों।
अपने हालात का रोना रोना नही है तेरे आगे, पर जानना चाहता हूँ न करके कितना दूखाया हूँ दिलको तेरे।
किसी और के सवालों का जवाब देना नहीं चाहता, पर तेरी हर इच्छा को पूरा करना चाहता हूँ।
क्यूँ नाच नचा रहा हैँ तु मुझे इतना, जबकि नांच रहा हूँ तेरी माया में रच बसके।
इल्जामों को नाम न देता हूँ तेरा, गाना चाहता हूँ गीत तेरी दरियादिली के।
मत छोड़ तू मुझे अकेला संसार सागर में, नैंया पार लगा दे अनुरूप ढालके तेरे।
- डॉ.संतोष सिंह
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