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Hymn No. 2449 | Date: 23-Sep-2001
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हो गया हूँ दीवाना, दीवानो की महफिल में आके।
हो गया हूँ दीवाना, दीवानो की महफिल में आके।
न था अपना कोई ठिकाना, जो मिल गया मुकाम कायम का।
संग रहने को देना पड़ता है नजराना, प्रेम से भरे दिल का।
तरसते है यहाँ अनेको जिसने जाना, पल भर के लिये होना पड़ता है कुर्बान।
बड़ी मुश्किल है किसीको समझाना, जिसने दिल लगाया उसने हो जाना।
आँखों ही आँखों से पीते और पिलाते है, होंश होते हुये होश गुमाते है।
चलती नहीं किसी ओर की यहाँ, बड़े बड़े सत्ताधीश भी है सर झुकाते।
किसको है फुरसत, हर दिल गुम है यार के संग कल्पनाओं के लोक में।
बदलती है दुनिया बिना इशारे के, रखता है ख्याल वो, अपने प्यारो का।
कौन कहता है उसको पड़ी नहीं हैं, पल पल तड़पते देखा है हमने उसको।


- डॉ.संतोष सिंह